‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बीमारी से पीड़ित छात्रा का मददगार बना रावतपुरा सरकार संस्थान

रायपुर, 8 जनवरी 2019।

पश्चिम बंगाल से सुनहरे भविष्य के सपने लेकर पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ आई एक बेटी की मदद के लिए श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ने अपने हाथ आगे बढ़ाये हैं। अटल नगर स्थित रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट में डी.एड. सेकंड ईयर की छात्रा प्रियंका घोष की सालभर की फीस संस्थान ने माफ कर दी है। अब संस्थान छात्रा के इलाज पर आने वाले खर्च का जिम्मा उठाने की तैयारी में है।

पीजीडीसीए, एमबीए करने के बाद छात्रा डी.एड. फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रही है, लेकिन ‘वेस्कुलाइटिस पेन’ नामक “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” बीमारी ने उसे आ घेरा है। इस बीमारी में शरीर के अंग धीरे-धीरे गलने लगते हैं और पूरे शरीर में असहनीय दर्द होता है। छात्रा का सीएमसी वेल्लूर के बाद कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। छात्रा को चेकअप के लिए हर छह महीने में एक बार कोलकाता जाना पड़ता है। वर्ष 2006 से छात्रा इस बीमारी से पीड़ित है। लेकिन वर्ष 2014 में ‘वेस्कुलाइटिस पेन’ बीमारी का पता चला। छात्रा को हर महीने करीब दस से बारह हजार रुपये की दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं। कई बार रुपयों का इंतजाम नहीं हो पाने से दवाइयां भी नहीं खरीद पाती है।

छात्रा की माली हालत नहीं है ठीक

छात्रा के माता पिता कोलकाता में रहते हैं, बीते दिनों एक हादसे में छात्रा की मां की रीढ़ की हड्डी फ्रैक्चर हो गई, जिसके बाद खेती-किसानी करके उसके पिता बमुश्किल छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च, पत्नी का इलाज और घर का खर्च चला रहे हैं। पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि अपनी बेटी के इलाज की सभी दवाएं खरीद सकें।

इलाज के लिए छात्रा को करना पड़ा रेस्टोरेंट में काम

पढ़ाई में होशियार छात्रा प्रियंका घोष ने कभी सोचा भी नहीं था कि उसे ऐसी लाइलाज बीमारी हो जाएगी। इलाज का खर्च निकालने के लिए छात्रा ने बीमारी की हालत में ही रेस्टोरेंट में देर रात 12 बजे तक काम किया है। वहां से हटाये जाने के बाद देवेन्द्र नगर स्थित अपने किराये के मकान में बच्चों को ट्यूशन देने के साथ एक नर्सिंग कॉलेज में पढ़ा रही है।

सरकार और प्रशासन से नहीं मिली मदद

छात्रा ने अपनी बीमारी के इलाज के लिए पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व कृषि मंत्री और पूर्व स्थानीय विधायक  के अलावा रायपुर के तत्कालीन कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई। लेकिन सिवाय अंबेडकर अस्पताल रेफर करने और कोरे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। थक हारकर छात्रा ने रावतपुरा सरकार संस्थान को अपनी पीड़ा बताई। जिसके बाद संस्थान ने अपने सामाजिक सरोकारों को समझकर मानवीयता दिखाते हुए छात्रा के पूरे साल की फीस माफ कर दी है। संस्थान छात्रा की दवाईयों का खर्च उठाने पर भी विचार कर रहा है।

रावतपुरा सरकार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के कॉलेज नॉन-प्रोफिटेबल चेरिटेबल ट्रस्ट के अधीन संचालित हैं। ट्रस्ट की ओर से पहले भी जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं की मदद की जाती रही है।

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