श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, कुम्हारी में राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई ने मनाया सद्भावना दिवस।

कुम्हारी, 20 अगस्त

श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी (SRIP) कुम्हारी, में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की इकाई संचालित करने की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके बाद राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़े एसआरआईपी के विद्यार्थियों ने अपने पहले कार्यक्रम में सद्भभावना दिवस पर देश की एकता एवं अखंडता को बनाये रखने की शपथ ली।

सद्भावना दिवस की शपथ

20 अगस्त को सद्भावना दिवस मनाते हुए देश भर के लोगों द्वारा शपथ भी ली जाती है। जो इस प्रकार है:

“मैं ये पूरी गंभीर प्रतिज्ञा लेता हूँ कि मैं जाति, क्षेत्र, धर्म और भाषा को बिना ध्यान दिये भारत के सभी लोगों की भावनात्मक एकात्मकता और सद्भावना के लिये कार्य करूंगा। मैं कसम खाता हूँ कि बिना हिंसा के संवैधानिक साधनों और बातचीत के द्वारा एक-दूसरे के बीच की दूरियों को अवश्य समाप्त कर दूँगा।”

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के जन्मदिवस को हर वर्ष 20 अगस्त को सद्भभावना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘समरसता दिवस’ या ‘राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस’ के नाम से भी जाना जाता है। सद्भावना मतलब एक-दूसरे के प्रति अच्छी भावना रखना। 20 अगस्त, 1944 को पैदा हुए राजीव गांधी भारत के छठे प्रधानमंत्री रहे। वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और फ़िरोज़ गांधी के बड़े बेटे थे। 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदुर में उनकी हत्या कर दी गयी। उनकी स्मृति में प्रत्येक वर्ष ‘सद्भावना दिवस’ मनाया जाता है।

सद्भभावना दिवस के अवसर पर श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में “तकनीकी विकास वरदान या अभिशाप” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें एसआरआईपी के स्टूडेंट्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिकतर छात्रों ने तकनीकी विकास के पक्ष में ही अपनी बात रखी। जबकि समाज में बढ़ रही हिंसा, यौन अपराध, साइबर आर्थिक अपराध, डिजिटल डकैती और निजता के भंग होने पर मंडरा रहे खतरे को लेकर कुछ छात्रों ने तकनीकी विकास को अभिशाप भी माना।

तकनीकी विकास की वजह से मेडिकल, शिक्षा, संचार और व्यापारिक गतिविधियों को पंख लगे हैं। लेकिन तकनीकी विकास ने मनुष्य के नैतिक पतन और सामाजिक मूल्यों के क्षरण में भी बड़ी महती भूमिका निभाई है। स्वर्गीय राजीव गांधी को भारत में कम्प्यूटर क्रांति को लाने का श्रेय जाता है। महज 40 वर्ष की उम्र में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले राजीव गांधी ने भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा था।

आज भारत दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सुपर पॉवर बन गया है। इसकी बुनियाद राजीव गांधी ने 1985 में आईटी क्रांति के जरिए रखी थी। उनके द्वारा देश के लिये किये गये कई सामाजिक और आर्थिक कार्यों को एक विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण को साफतौर पर देखा जा सकता है।

राजीव गांधी ने देश के भीतर सांप्रदायिक सद्भाव, शांति और राष्ट्रीय अखंडता का प्रचार करने की कोशिश की। इसे रेखांकित करते हुए कांग्रेस उनकी जयंती को सद्भावना दिवस के तौर पर मनाती है।

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